 |
| जीत हमारी है |
प्रिय बच्चों पिछले लेख मे मैंने जीवन मे आगे बढ्ने के लिए धन की उपयोगिता का मर्म समझाया था कि धन अपने पथ पर अग्रसर होने के लिए कभी रुकावट नहीं होता है यदि आप मे काबिलियत और लगन है तो आप हर वो खुशी पा सकते है जिसके आप हकदार है । काबिलियत के साथ उद्देश्य भी स्पष्ट होना चाहिए ।
लक्ष्य रहित जीवन तो बिना पतवार की नाव की तरह है जिसकी सफलता मे पूर्णतया संदेह है । लक्ष्य की स्थिरता ही कुशल सेना नायक की सफलता का कारण है ।
एक उदाहरण मे यह स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है कि लक्ष्य यदि स्पष्ट है तो आप उसकी प्राप्ति के लिए अथक प्रयास खुद ही करते है और उसे पा कर रहते है ।
गैलीलियो आरंभ से ही गणित प्रेमी था ,किन्तु उसके पिता उसे डाक्टर बनाना चाहते थे । बालक गैलीलियो पिता की आँखों से बच कर गणित शास्त्र के अद्ध्यन मे लगा रहा और एक दिन मात्र अट्ठारह वर्ष की आयु मे ही गिरिजाघर मे पेंडुलम का सिद्धान्त का आविष्कार किया । आगे चल कर दूरबीन की रचना कर विज्ञान जगत को एक नई दिशा दी । यदि वह अपने निर्धारित लक्ष्य पर नहीं चलता तो वह कभी सफल नहीं होता ।
डिमस्थनीज की कहानी तो इससे भी ज्यादा रोचक है वह तो एक कुशल वक्ता बनना चाहता था लेकिन वह तुतला कर बोलता था ऐसे मे प्रख्यात वक्ता होना दूर की बात थी । लोग उसके इस लक्ष्य के विषय मे जानकार उसका मज़ाक उडाते थे , लेकिन उसका लक्ष्य स्पष्ट था उसे कुशल वक्ता बनना ही था इसके लिए उसने बड़ी मेहनत की । वह अपने मुंह मे ककड़ियाँ भरकर बोलने का प्रयास करता था और एक दिन वह अपने लक्ष्य मे सफल हुआ ।
माइकेल एंजेलो की कहानी भी गैलीलियो की तरह ही है । वह चित्र कला का प्रेमी था उसके पिता भी उसकी चित्रा कला के खिलाफ थे लेकिन उसकी लगन ने उसे विश्व प्रसिद्ध चित्र कार बना दिया।
यही सच है कि प्रत्येक व्यक्ति मे राष्ट्र निर्माता होने की शक्ति छुपी हुई है परंतु लक्ष्य निर्धारण के बिना सफलता संभव नहीं है ।
आज मै अक्सर देखती हूँ कि युवाओं के भटकते कदम उन्हे भटकाव की ओर ही ले जाते है ।
प्यारे बच्चों इससे पहले भी मैंने कई बाते बताई है उम्मीद है तुम सब कुछ लाभ अवश्य उठा रहे होगे , मुझे बड़ी खुशी होगी यदि मै तुम मे से किसी एक को भी लाभान्वित करा पाने मे सक्षम रहती हूँ ।
इतिहास इस बात का साक्षी है की जो कर्मवीर अपने पथ पर बढ़ता गया है ,जिसने विपदाओं का सामना किया है , संकट की ऊंची घाटियों को लांघने का प्रयास किया है , उसे ही ऊंचे से ऊंचा यश और सम्मान मिला है । तुम्हारी मंजिल मे निर्धनता ही सबसे पहली रुकावट है , जिसके नीचे सारा भारत कराह रहा है ; किन्तु क्या यह निर्धनता तुम्हारा मार्ग रोक सकेगी ? कदापि नहीं । अगर तुम्हारा मनोबल दृढ़ है , अगर तुम्हारा साहस प्रबल है ,तो कोई बाधा तुम्हारे सामने टिक नहीं सकती । तुम्हें राह बताने के लिए अनेकों उदाहरण भरे पड़े है , जिनकी रह पर चल कर तुम भी अपने लक्ष्य को पा सकते हो और महान बन सकते हो ।
प्रसिद्ध अङ्ग्रेज़ी साहित्यकार गोल्ड स्मिथ कभी पैसे पैसे का मोहताज था और भिक्षाटन के द्वारा अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति करता था , किन्तु उसका मनोबल और मस्तिष्क भिक्षुक नहीं था । अपनी साधना मे वह लगा रहा और एक दिन निर्धनता उसका मार्ग रोक नहीं पाई और वह एक महान साहित्यकार के रूप मे विख्यात हुआ ।
महान फर्गुसन एक गडेरिए का पुत्र था और बड़ी ही गरीबी के साथ जीवन यापन करता था । आगे चल कर वही फर्गुसन आकाश मे तारों की दूरी नाप सकने मे सफल निकला ।
आर्कराइट लोगों की हजामत बना कर अपना जीवन यापन करता था जो आगे चल कर रेल का आविष्कर्ता सिद्ध हुआ ।
शेक्सपियर , जिस पर अङ्ग्रेज़ी साहित्य को नाज है , कभी दर दर मारा फिरता था , किन्तु अपनी लगन और कर्तव्यनिष्ठा के कारण ही उसकी गणना यूरोप के सर्व श्रेष्ठ कवि एवं नाटक कार के रूप मे हुई ।
यही नहीं अपने देश मे भी कई ऐसी हस्तियाँ हुई है जिन्होने ये साबित कर दिखाया है की निर्धनता कभी भी कर्मवीरों का रास्ता नहीं रोक सकी है । लाल बहादुर शास्त्री जी, राजेंद्र प्रसाद जी , बाल गंगाधर तिलक जी का नाम हम प्रमुखता से ले सकते है ।
इसलिए बच्चों याद रखो निर्धनता किसी का भी रास्ता नहीं रोक सकती बस लगन और लालसा बलवती होनी चाहिए । अगली प्रस्तुति मे बात करेंगे लक्ष्य की ।